पदार्थ एवं पदार्थ के समूह

पदार्थ एवं पदार्थ के समूह

• पदार्थों के वर्गीकरण की आवश्यकता एवं इसका आधार
• विभिन्न लक्षणों के आधार पर वस्तुओं का वर्गीकरण

पदार्थ क्या है? हमारे आसपास के सभी वस्तुएं जिनमें भार होता है , जो स्थान घेरती हैं तथा जिसका ज्ञानेंद्रिय द्वारा एहसास किया जा सकता है, वह सभी पदार्थ कहलाती है। अतः प्रत्येक पदार्थ स्थान घेरती है तथा उसमें भार होता है। कई वस्तुएं एक ही पदार्थ से बनी होती है तथा ऐसा भी होता है कि एक ही वस्तु कई पदार्थों से मिलकर बनी होती है।

पदार्थ के वर्गीकरण की आवश्यकता एवं आधार

हर एक वस्तु अपने अपने गुणों और उपयोगिता के आधार पर एक दूसरे से अलग होती है। इन वस्तुओं के अलग-अलग होते हुए भी क्या इनमें कोई समानता दिखाई देती है? किसी वस्तु की पहचान इसके आकार, बनावट, रंग, उपयोग आदि के आधार पर की जाती है। जब हम वस्तुओं को उनके विशेष गुण और उपयोग आदि के आधार पर अलग-अलग समूहों में रखते हैं, तब उनकी पहचान आसानी से की जा सकती है। वस्तुओं को उनके समान्य लक्षणों के आधार पर अलग-अलग समूह में व्यवस्थित करने की क्रिया को वर्गीकरण कहते हैं।

पदार्थ की बाहरी संरचना के आधार पर वर्गीकरण भौतिक वर्गीकरण कहलाता है। तथा आंतरिक संरचना के आधार पर वर्गीकरण रसायनिक वर्गीकरण कहलाता है। भौतिक वर्गीकरण के अंतर्गत पदार्थों को ठोस, द्रव एवं गैस में विभाजित किया जा सकता है, जबकि रसायनिक वर्गीकरण के अंतर्गत पदार्थ को तत्व योगिक एवं मिश्रण में विभाजित किया जाता है।

विभिन्न लक्षणों के आधार पर वर्गीकरण

पदार्थों को हम निम्नलिखित आधारों पर वर्गीकृत कर सकते हैं :-

  • पदार्थ की अवस्था के आधार पर
  • जल में घुलनशील ता के आधार पर
  • पारदर्शिता के आधार पर
  • जल के सापेक्ष भार के आधार पर
  • कठोरता के आधार पर
  • चुंबक के सापेक्ष व्यवहार के आधार पर

पदार्थ की अवस्थाओं के आधार पर :- प्रत्येक पदार्थ की तीन भौतिक अवस्थाएं होती हैं। ठोस, द्रव तथा गैस

ठोस पदार्थ :- ठोस पदार्थों का आकार एवं आयतन दोनों निश्चित होते हैं। ठोस पदार्थों में कण ( अणु ) बहुत पास पास होते हैं। इनमें आपसी आकर्षण बल बहुत अधिक होता है जो इन्हें एक साथ बांधे रखता है। ठोस पदार्थों के कण अपने स्थान पर लगभग स्थिर होते हैं। इसी कारण इनकी आकृति एवं आयतन दोनों अनिश्चित होते हैं।

द्रव :- द्रव का कोई निश्चित आकृति नहीं होती है। जिस बर्तन में इन्हें रखा जाए वह उसका स्थान ले लेते हैं। ठोस पदार्थों की तुलना में द्रव के अणु एक दूसरे से दूर दूर होते हैं। इनमें आपसी आकर्षण बल ठोस की तुलना में कम होता है जो इन्हें एक साथ बांधे रखता है। इसी कारण द्रव पदार्थों की आकृति निश्चित नहीं होती है, किंतु इनके कणों का एक सीमा में बंधे होने के कारण इनका आयतन निश्चित होता।

गैस :- घर में जलती हुई अगरबत्ती को आप सभी ने जरूर देखा होगा इनमें से काले भूरे रंग का धुआं निकलता है। इस धुआं की बनावट एवं आयतन दोनों ही निश्चित नहीं होती। यह जिस स्थान पर रखे जाते हैं उसी की बनावट और आयतन प्राप्त कर लेते हैं। इस अवस्था को गैस कहते हैं।जैसे पदार्थों में अपेक्षाकृत बहुत दूर दूर होते हैं और इनमें आपसी आकर्षण बल नहीं के बराबर होता है।
पदार्थ की अवस्था के आधार पर पदार्थों को ठोस द्रव एवं गैस में वर्गीकृत किया जाता है।

जल में घुलनशीलता के आधार पर :- किसी द्रव में घूलने वाले पदार्थों को घुलनशील पदार्थ कहते हैं। इसी प्रकार किसी द्रव जैसे पानी में ना घूलने वाले पदार्थों को अविलेय पदार्थ कहते हैं। कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जो एक द्रव में घुलनशील होते हैं परंतु दूसरे में घुलनशील , जैसे नमक पानी में घुलनशील परंतु मिट्टी के तेल में घुलनशील नहीं होता है।

जल के सापेक्ष भार के आधार पर :- कुछ पदार्थ जल की अपेक्षा भारी तथा कुछ हल्के होते हैं जो वस्तुएं जल में सामान्यता तैरती है वह जल से हल्की तथा जो डूब जाती है वह जल से भारी होती हैं। सरसों का तेल, लकड़ी का टुकड़ा तथा मोम जल में तैरते हैं जो कि जल से हल्के होते है , जबकि कांच की गोली तथा लोहे की कील जल में डूबती है क्योंकि यह जल्द से भारी होती है। इस प्रकार जल के सापेक्ष भार के आधार पर पदार्थों को हल्का यह भारी में वर्गीकृत किया जा सकता है।

पारदर्शिता के आधार पर :- वे पदार्थ जिनके आर पार देखा जा सकता है वह सभी पारदर्शी पदार्थ कहलाते हैं। पदार्थ के इस गुण को पारदर्शिता कहते हैं जैसे कांच, जल etc.

  • वे पदार्थ जिनके आर पार प्रकाश नहीं देखा जा सकता है अपारदर्शी पदार्थ कहलाते हैं । जैसे लकड़ी, कागज आदि
  • वे पदार्थ जिनके द्वारा धुंधला या आंशिक रूप से आर पार देखा जा सकता है। वह पारभासी कहलाते हैं जैसे तेल लगा कागज, पेंट लगा कांच इत्यादि।

कठोरता के आधार पर :- कुछ पदार्थ आसानी से दब जाते हैं। ऐसे पदार्थों को मुलायम पदार्थ कहते हैं। जबकि कुछ पदार्थ उंगलियों से दबाने पर नहीं रखते इन पदार्थों को कठोर पदार्थ कहा जाता है।

चुंबक के सापेक्ष व्यवहार के आधार पर :- चुंबक जिन पदार्थों को चिपका लेता है अथवा अपनी और आकर्षित करता है वह सभी पदार्थ चुंबकीय पदार्थ कहलाते हैं। जिन पदार्थों को आकर्षित नहीं करता वह अचुंबकीय पदार्थ कहलाते हैं। चुंबक लोहे से बनी वस्तुओं को अपनी ओर खींच लेता है। लोहे के अतिरिक्त चुंबक, निकिल, कोबाल्ट जैसे अन्य धातुओं से बनी वस्तुओं को भी अपनी और आकर्षित करता है।

पदार्थों के निर्माण की मौलिक इकाई

पदार्थ सूक्ष्म कणों से मिलकर बने होते हैं जिन्हें अनु या परमाणु कहते हैं।

अणु :- पदार्थ का वह शूक्ष्तम गुण जो स्वतंत्र अवस्था में रह सकता है। तथा उसमें पदार्थ के सभी गुण विद्यमान होते हैं अणु कहलाता है। किसी तत्व के सभी अणु एक समान होते हैं तथा भिन्न -भिन्न तत्वों के अणु गुणों में भिन्न भिन्न होते हैं।
परमाणु :- किसी पदार्थ का व सूक्ष्म कण जो स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकता परंतु रसायनिक अभिक्रिया में भाग लेता है वह परमाणु कहलाता है।

अणु तथा परमाणु को नग्न आंखों से देखना संभव नहीं है। परमाणु आपस में संयुक्त होकर अणु का निर्माण करते हैं। समान परमाणुओं के सहयोग से तत्व के अणु बनते हैं। जैसे ऑक्सीजन, हाइड्रोजन भिन्न परमाणु के सहयोग से यौगिक के अणु बनते हैं। जैसे जल, कार्बन डाइऑक्साइड तथा परमाणु किसी पदार्थ के निर्माण की मौलिक इकाई है

इस बात को ध्यान में रखिए कि ऐसे सूक्ष्म कणों को केवल कल्पना ही की जा सकती है इनको देखना या दिखाना संभव नहीं है सारे पदार्थ अति सूक्ष्म कणों से बनते हैं तभी इन्हें पदार्थ की संरचना की इकाई कहा जाता है

परमाणु शब्द को यूनानी भाषा में एटॉक्स कहते हैं जिसका अर्थ अविभाज्य होता है डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के अनुसार तत्व अत्यंत सूक्ष्म अविभाज्य कणों से बना होता है जिन्हें परमाणु कहते हैं

इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन की खोज के बाद परमाणु को विभागीय माने जाने लगा है। आधुनिक परमाणु सिद्धांत के अनुसार परमाणु विभाज्य है इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन को परमाणु का मूलभूत कण कहते हैं।

  • प्रोटॉन इस पर धन आवेश होता है इसे p से दर्शाया जाता है।
  • इलेक्ट्रॉन पर ऋण आवेश होता है इसे e से दर्शाया जाता है।
  • न्यूट्रॉन इस पर कोई आदेश नहीं होता उदासीन होता है । इसे n से दर्शाया जाता है।

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