दैनिक जीवन में विज्ञान

दैनिक जीवन में विज्ञान

मनुष्य स्वभाव से सदैव ही जिज्ञासु रहा है। उसे हमेशा अपने आसपास की दुनिया में घटने वाली प्रत्येक घटनाक्रम में कब, कहां, कैसे और क्यों जैसे प्रश्नों के उत्तर ढूंढने की उत्सुकता होती रही है। वास्तव में विज्ञान की शुरुआत की थी उत्सुकता से होती है। वैज्ञानिक किसी भी समस्या या जिज्ञासा का समाधान प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक विधि के विभिन्न चरणों के द्वारा निष्कर्ष निकालते हैं और उससे समाज को लाभ पहुंचाते हैं।

समस्या समाधान प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक विधि के निम्नलिखित चरण है :-

  1. जिज्ञासा / प्रश्न करना
  2. परिकल्पना
  3. परीक्षण
  4. निरीक्षण/ विश्लेषण /वर्गीकरण
  5. अभिलेखन
  6. पुनर्विचार
  7. निष्कर्ष निकालना
  8. नए प्रयोग

दैनिक जीवन में विज्ञान की देन

मनुष्य के दैनिक जीवन में विज्ञान के प्रयोग के वजह से कई परिवर्तन आए हैं। कृषि कार्य शीघ्र हो इसलिए ट्रैक्टर व अन्य कृषि यंत्र जैसे थ्रेशर मशीन, सीड ड्रिल, हार्वेस्टर आदि विज्ञान की ही देन है। घर बैठे देश विदेश की जानकारी व मनोरंजन टेलीविजन व रेडियो द्वारा किया जाता है। गैस के चूल्हे द्वारा शीघ्र खाना पक जाना इससे समय और श्रम की बचत होती है तथा प्रदूषण भी कम होता है। यातायात के विभिन्न साधन जैसे रेल गाड़ी, कार, बस तथा वायुयान हैं जिनके द्वारा कुछ ही घंटों में लंबी यात्रा तय की जा सकती है। विज्ञान की खोजों के फस्वरूप ही कृषि यंत्रों, यातायात एवं संचार के साधनों तथा अन्य अनेक प्रकार के साधनों एवं सामग्रियों का विकास संभव हो पाया है। विज्ञान ने हमारी बहुत सी समस्याओं जो, भोजन, स्वास्थ्य और यातायात से जुड़ी हैं, को सुलझाने में सहायता की है। पंप तथा नहर सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराती है। आज उत्तम बीज, उर्वरक तथा कीटनाशक दवाई उपलब्ध है। इसी प्रकार मनोरंजन के क्षेत्र में, संचार के क्षेत्र में, चिकित्सा के क्षेत्र में तथा शिक्षा के क्षेत्र में विज्ञान ने अभूतपूर्व योगदान दिया है।

समाचार पत्र और रेडियो द्वारा हमें देश विदेश में हो रही घटनाओं की जानकारी मिलती है। क्रिकेट मैच और देश-विदेश में होने वाले विभिन्न समारोह का सीधा प्रसारण हम टेलीविजन पर देख सकते हैं। टेलीफोन और मोबाइल फोन द्वारा हम दूर स्थित किसी व्यक्ति से बात कर सकते हैं। यह सभी विकास विज्ञान द्वारा ही संभव हो पाया है। मनुष्य सदा से अधिक ज्ञान प्राप्त करने और उसका सही रूप में अनुप्रयोग करने के लिए प्रयत्नशील रहा है।

परंपरागत एवं वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान की भूमिका

विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान में अपना योगदान दिया है। किस तरह विज्ञान ने योगदान दिया है विज्ञान ने हमारे दैनिक जीवन में होने वाले बहुत से कार्य को आसान बना दिया है। नीचे दिए गए तालिका में परंपरागत एवं वर्तमान में प्रयोग होने वाले साधनों को दर्शाया गया है।

विज्ञान के दुरुपयोग से उत्पन्न समस्याएं?

  • विज्ञान में अनेक असंभव लगने वाली बातों को भी संभव कर दिखाया है। जीवन का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं बचा है जिसे विज्ञान में प्रभावित ना किया हो। विज्ञान से मनुष्य को जहां अपार सुविधाएं प्राप्त हुई है। वहीं इसके दुरुपयोग और संयमित उपयोग से अनेक समस्याएं भी उत्पन्न हुई है। जैसे :-
  • विज्ञान की प्रगति के फलस्वरुप यातायात के क्षेत्र में पेट्रोल और डीजल चालित वाहनों की वृद्धि के कारण पर्यावरण असंतुलित और प्रदूषित हो रहा है।
  • रसायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशक दवाओं के उपयोग से कृषि उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि हुई है किंतु अनुचित प्रयोग से मृदा प्रदूषण एवं जल प्रदूषण का संकट उत्पन्न हो गया है।
  • नदियां प्रदूषित होती जा रही है और किसान के मित्र कहे जाने वाले केंचुआ सांप आदि की संख्या घटती जा रही है।
  • भूजल के अत्यधिक दोहन से भूजल स्तर लगातार नीचे खिसकता जा रहा है जिससे कुएं एवं तालाब सूखते जा रहे हैं।
  • मानव बस्तियों में कूड़े-कचरे एवं अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण की समुचित व्यवस्था के अभाव में मानव जीवन संकटग्रस्त हो रहा है।
  • रेडियोधर्मी विकिरण के कारण पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व का भय उत्पन्न हो गया है
  • ओजोन परत में छिद्र वायु प्रदूषण के कारण हुआ है।
  • रेफ्रिजरेटर तथा एयर कंडीशनर में प्रयुक्त गैसों से वायुमंडल में क्लोरो फ्लोरो कार्बन की मात्रा में वृद्धि हो रही है जिससे ओजोन परत का निरंतर क्षरण हो रहा है।
  • परमाणु ऊर्जा के अनुचित प्रयोग से हो रहे विनाश जैसे जापान के हिरोशिमा एवं नागासाकी में पलक झपकते ही लाखों लोगों का जीवन का अंत हो गया।
  • सड़कों पर दौड़ते वाहनों का धुंआ, पेट्रोल एवं डीजल के दहन से वायु में कार्बन डाइऑक्साइड एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइड की वृद्धि हो रही है जिससे चित्र तथा दमा अस्थमा आदि लोग हो रहे हैं।

वैज्ञानिक खोजों में भारतीय एवं विदेशी वैज्ञानिकों का योगदान :-

प्राचीन भारतीय विज्ञानिक चरक ने जड़ी बूटियों के औषधीय गुणों के द्वारा रोगों के उपचार की विधि का विकास किया तथा सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आर्यभट्ट ने पाई का मान तथा श्रीधराचार्य सर्वसमीकरण का हल खोजने वाले प्रथम गणितज्ञ थे। आधुनिक वैज्ञानिक खोजों में भारतीय एवं अन्य देशों के वैज्ञानिक एवं उनकी खोजों को नीचे तालिका में दर्शाया गया है।

हमने क्या सीखा

दैनिक जीवन में विज्ञान की देन ने जीवन को सरल व सुखमय बनाया है। विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान के योगदान से विकास संभव हो सका है। विज्ञान की खोज एवं अविष्कारों का दुरुपयोग भी हो रहा है। परमाणु बम हाइड्रोजन बम प्रक्षेपास्त्र आदि का निर्माण हुआ है।

विज्ञान की प्रगति के फलस्वरूप वाहनों की नाशक दवाओं के उत्पादन आदि में अत्यधिक वृद्धि हुई है। जिससे बढ़ती जनसंख्या की मांगों की पूर्ति तो हुई है परंतु इससे पर्यावरण असंतुलन और पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है और मानव जीवन संकट में होता जा रहा है।

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