सर्व शिक्षा अभियान (Sarva Shiksha Abhiyan)

सर्व शिक्षा अभियान योजना क्या है? (Sarva Shiksha Abhiyan), What is SSA, एसएसए (SSA)

सर्व शिक्षा अभियान’

सर्व शिक्षा अभियान (BRC) भारत सरकार का एक प्रमुख शैक्षिक कार्यक्रम है। जिसकी शुरूआत अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा एक निश्चित समयावधि के तरीके से प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण को प्राप्त करने के लिए किया गया, सर्व शिक्षा अभियान की योजना नवंबर 2000 ईस्वी में बनी थी तथा 1 अप्रैल 2001 ईस्वी में से प्रारंभ किया गया था । (2001-02) मे तात्कालिक प्रधानमंत्री श्रीअटल बिहारी बाजपेयी द्वारा प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लिए चलाया गया था सर्व शिक्षा अभियान के अध्यक्ष प्रधानमंत्री तथा उपाध्यक्ष मानव संसाधन विकास मंत्री होता है। जैसा कि भारतीय संविधान के 86वें संशोधन द्वारा निर्देशित किया गया है सर्व शिक्षा अभियान को 100% सफल बनाने के लिए प्रारंभिक शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 को एक अप्रैल 2010 से लागू किया गया है। जिसके तहत 6-14 साल के बच्चों की मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के प्रावधान को मौलिक अधिकार बनाया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2010 तक संतोषजनक गुणवत्ता वाली प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण को प्राप्त करना है। एसएसए (SSA) में 8 मुख्य कार्यक्रम हैं।

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सर्व शिक्षा अभियान (Sarva Shiksha Abhiyan)

सर्व शिक्षा अभियान का लक्ष्य :-

देश के प्राइमरी स्कूलों (प्रारंभिक शिक्षा) के ढांचे को मजबूत बनाना है। देश का हर बच्चा प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर सके और अपने जीवन का विकास कर सके। इस योजना के अनेक उद्देश्य हैं जैसे- बालक बालिका का अंतर समाप्त करना, देश के हर गांव शहर में प्राथमिक स्कूल खोलना और मुफ्त शिक्षा प्रदान करना, निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, स्कूल ड्रेस देना, शिक्षकों का चयन करना, उन्हें लगातार प्रशिक्षण देते रहना, स्कूलों में अतिरिक्त कक्षा का निर्माण करना, पेयजल और प्रसाधन की व्यवस्था करना। एसएसए (SSA) एक विशिष्ट विकेंद्रित योजना है। इस योजना के लिए “स्कूल चले हम” नामक कविता बनाई गई थी जो बहुत लोकप्रिय हुई थी।

सर्व शिक्षा अभियान का उद्देश्य :-

  • सभी बच्चों के लिए वर्ष 2005 तक प्रारंभिक विद्यालय, शिक्षा गारंटी केन्द्र, वैकल्पिक विद्यालय, “बैक टू स्कूल” शिविर की उपलब्धता
  • वर्ष 2010 तक सभी बच्चों को विद्यालय में बनाए रखना।
  • सभी बच्चे 2010 तक 8 वर्षों की स्कूली शिक्षा पूरी कर लें।
  • संतोषजनक कोटि की प्रारंभिक शिक्षा, जिसमें जीवनोपयोगी शिक्षा को विशेष महत्त्व दिया गया हो, पर बल देना।
  • सभी बच्चे 2007 तक 5 वर्ष की प्राथमिक शिक्षा पूरी कर लें।
  • स्त्री-पुरुष असमानता तथा सामाजिक वर्ग-भेद को 2007 तक प्राथमिक स्तर तथा 2010 तक प्रारंभिक स्तर पर समाप्त करना। (सर्व शिक्षा अभियान योजना क्या है?)

सर्व शिक्षा अभियान के कार्य :

  • प्राथमिक शिक्षा के स्तर वर्ष 2007 तक तथा 2010 तक बुनियादी शिक्षा स्तर पर सभी प्रकार के लैंगिक एवं सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना।
  • सन 2005 से सभी स्कूलों में शिक्षा गारंटी योजना केंद्र / ब्रिज पाठ्यक्रमों में 6 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के समस्त बच्चे इस अभियान में शामिल किए गए हैं।
  • 2010 तक आठवीं कक्षा तक सभी को शिक्षा देने का प्रावधान था ।
  • जीवन हेतु शिक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए संतोषप्रद गुणवत्ता की प्राथमिक शिक्षा पर बल देना।

सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत बजट का प्रावधान :-

Sarva Shikhsa Abhiyan कार्यक्रम के अंतर्गत नौवीं पंचवर्षीय योजना में केंद्र और राज्य सरकारों के मध्य 85:15 के अनुपात में वह सहभागिता प्रबंध के आधार पर सहायता तय की गई। यानी ₹100 में ₹85 केंद्र सरकार खर्च करेगी तथा ₹15 राज्य सरकार खर्च करेगी। दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान सहभागिता प्रबंधन 75:25 हो गया तथा 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान सहभागिता प्रबंधन 65:35 तथा 2012 से 50: 50 के आधार पर दी जाएगी ।

सर्व शिक्षा अभियान किस राज्य में लागू नहीं है?

इस योजना के अंतर्गत भारत के सभी राज्य आते हैं l परन्तु इसमें आठ उत्तर पूर्वी राज्य शामिल नहीं है। यह कार्यक्रम संपूर्ण देश में लागू किया जा रहा है तथा इसमें बालिकाओं तथा अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के छात्रों तथा कठिन परिस्थितियों में रह रहे छात्रों की शैक्षिक आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सर्व शिक्षा अभियान का लाभ :-

  • Sarva Shiksha Abhiyan के तहत स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में भारी कमी लाने में सफलता प्राप्त हुई है।
  • एसएसए (SSA) में बालिकाओं एवं समाज के कमजोर वर्गों के बच्चों पर विशेष ध्यान देने का प्रावधान किया गया है।
  • इसके तहत ऐसे बच्चों के लिए निशुल्क पाठ्य पुस्तकों की व्यवस्था सहित कुछ अन्य कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ।

प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने ग्रामीण बच्चों के लिए 1 किलोमीटर की दूरी में प्राथमिक स्कूल खोले हैं और 3 किलोमीटर की दूरी में उच्च प्राथमिक स्कूल (कक्षा 1 से 8 तक) की सुविधाएं दी हैं, जिससे अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग के बच्चे भी स्कूलों में जा सके।

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