पादपों में जनन (Reproduction in Plants)

पादपों में जनन (Reproduction in plants) :-

जनन से क्या अभिप्राय है? सभी जीवित जीव अपने जैसे समान जीवो को उत्पन्न करते हैं इन्हें जनन कहते हैं l पादपों में मूल (जड़) तना पत्ती आदि होती है, इन्हें कायिक अंग कहते हैं। पुष्प ही पादपों में जनन का कार्य करते हैं । अतः पुष्प पादप के जनन अंग होते हैं। किसी पुष्प में केवल नर जनन अंग या मादा जनन अंग अथवा दोनों ही हो सकते हैं । पादपों में विभिन्न विधि द्वारा अपनी संतति उत्पन्न करते हैं।

पादपों में जनन दो प्रकार का होता है?

जनन के प्रकार लैंगिक और अलैंगिक जनन

अलैंगिक जनन (Asexual reproduction) :- अलैंगिक जनन में पादप बिना बीजों के ही नये पादप को उत्पन्न कर सकते हैं।

कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation):-

एक प्रकार का अलैंगिक जनन होता है । जिसमें पादप के मूल, तने, पत्ती अथवा कली जैसे किसी का एक अंग द्वारा नया पदक प्राप्त किया जा सकता है । क्योंकि जनन पादप के कायिक भागों से होता है अतः इसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं।

  • कायिक प्रवर्धन के द्वारा गुलाब, आलू तथा हल्दी आदि उगाई जा सकती है।
  • ब्रायोफिलम में पत्ती के किनारे की गर्त में कलिकाए होती है। यदि पादप की पत्ती आर्द्र मृदा पर गिर जाए तो प्रत्येक कली से एक पादप को जन्म दे सकती है।
  • कुछ पादपों की जड़े भी नए पादपों को जन्म दे सकते हैं जउदाहरण के रूप में शकरकंद, डहलिया आदि।
  • केक्टस में भी कायिक विधि द्वारा नए पादप का विकास होता है।

कायिक प्रवर्धन के प्रमुख विशेषताएं

कायिक प्रवर्धन द्वारा पादप कम समय में उगाए जा सकते हैं।
बीजों से उगाए जाने वाले पादप की अपेक्षा कायिक प्रवर्धन द्वारा उत्पन्न पादपों में पुष्प तथा फल कम अवधि में ही आ जाते हैं।
नए पादप जनक पादप की यथार्थ प्रतिलिपि होते हैं क्योंकि वे एक ही जनक द्वारा उत्पन्न होते हैं।

मुकुलन (Budding)

यीस्ट एक सूक्ष्म जीव होता है , जिसे देखने के लिए सूक्ष्म दर्शी की आवश्यकता होती है। यीस्ट कुछ ही घंटों में वृद्धि करके अपनी संख्या बढ़ा सकता है। यीस्ट मुकुलन द्वारा प्रजनन करता है।

विखंडन (fragmentaion)

तालाब में शैवाल खंडन द्वारा जनन करते है । जब जल और पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं, तो शैवाल वृद्धि करते हैं । और तेजी से खंडन द्वारा गुणन करते हैं । शैवाल दो या दो से अधिक खंडों में विभाजित हो जाते हैं। यह खंड अथवा टुकड़े नए जीवों में वृद्धि कर जाते हैं । यह प्रक्रम निरंतर चलता रहता है और कुछ ही समय में शैवाल एक बड़े क्षेत्र में फैल जाते हैं।

बीजाणु द्वारा (Spore Formation) :-

बीजाणु हवा में तैरते रहते हैं। चूंकि यह बहुत हल्के होती है , इसलिए लंबी दूरी तक जा सकते हैं । बीजाणु अलैंगिक जनन ही करते हैं। प्रत्येक बीजाणु उच्च ताप और निम्न आद्रता जैसे प्रतिकूल परिस्थिति को झेलने की एक कठोर सुरक्षात्मक आवरण से ढका होता है, इसलिए ये लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं ।अनुकूल परिस्थितियों में भी बीजाणु अंकुरित हो जाते हैं ।और नए जीव में विकसित हो जाते हैं । मांस और फर्न जैसे पादप बीजाणु द्वारा जनन करते है।

लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) :-

पौधे में पुष्प जनन अंग होते हैं पुंकेसर नर जनन अंग तथा स्त्रीकेसर मादा जनन अंग होता है

  • ऐसे पुष्प जिनमें या तो केवल पुंकेसर अथवा केवल इस तरीके से रहो उपस्थित होते हैं एक लिंगी पुष्प कहलाते हैं।
  • जिन पुष्पों में पुंकेसर के साथ और स्त्री केसर दोनों ही होते हैं वह द्विलिंगि पुष्प कहलाते हैं।
  • मक्का,पपीता और ककड़ी आदि पौधे में एक लिंगीपुष्प होते हैं जबकि सरसों, गुलाब और पिटुनिया के पौधे में द्विलिंगी पुष्प होते हैं।
  • नर और मादा एकलिंगी पुष्प दोनों ही एक पादप पर उपस्थित हो सकते हैं अथवा भिन्न पादप पर पाए जाते है।

परागण (Pollination) :-

सामान्यतः परागकणों में दृढ़ सुरक्षात्मक आवरण होता है जो उन्हें सूखने से बचाता है , क्योंकि परागकण हल्के होते हैं । अतः वह वायु अथवा जल द्वारा बहा कर ले जाए जा सकते हैं। पुष्पों पर बैठने वाले कीड़ों के शरीर पर परागण चिपक जाते हैं । जब कीट उसी प्रकार के किसी अन्य पुष्प पर बैठते हैं, तो पुष्प के वर्तिकाग्र पर कुछ परागकण गिर जाते हैं। परागकणों का परागकोश से पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण परागण कहलाता है । यदि परागण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं, तो इसे स्वपरागण कहते हैं । जब पुष्प के परागकण उसी पादप के किसी अन्य पुष्प वर्तिकाग्र पर गिरते हैं तो , इसे पर परागण कहते हैं।

निषेचन (Fertilisation) :-

नर तथा मादा युग्मको के युग्मन द्वारा बनी कोशिका युग्मनज कहलाती है। युग्मनज बनाने के लिए नर और मादा युग्मको के युग्मन का प्रक्रम निषेचन कहलाता है। युग्मनज भ्रूण में विकसित होता है।

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