प्रश्नोत्तर विधि (Question Answer Method)

प्रश्नोत्तर विधि / तर्क विधि /सुकराती विधि (Question Answer Method /Logical Method /socratic methods)

प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात की विधि को प्रश्नोत्तर विधि भी कहते हैं। यह शिक्षण की सबसे प्राचीन पद्धति है। प्रश्नोत्तर विधि के प्रवर्तक सुकरात को माना जाता है। सुकरात का विचार था कि शिक्षक इस प्रकार पाठ्यपुस्तक वस्तु को प्रस्तुत करें कि बालक सत्य की परख करके उसको आत्मसात कर सके। इनके अनुसार बालक में समस्त ज्ञान अंतर्निहित होता है। अध्यापक का कार्य केवल इस ज्ञान को बाहर निकालना होता है। प्रश्नोत्तर विधि बौध स्तर (Understanding Level ) का शिक्षण अधिगम कराते हैं।प्रश्नोत्तर विधि (Question Answer Method)

प्रश्नोत्तर विधि की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं :-

  • इस विधि में बालक के मानसिक स्तर , आवश्यकता तथा रुचियों का विशेष ध्यान रखा जाता है।
  • प्रश्नोत्तर विधि में बालक अधिक क्रियाशील रहता है तथा उसका ध्यान भी केंद्रित रहता है।
  • बालक की पूर्व ज्ञान से संबंध स्थापित करते हुए शिक्षक द्वारा नवीन ज्ञान प्रदान किया जाता है।
  • बालक को स्वयं सोचने के लिए अधिक अवसर दिया जाता है जिससे उन्हें नवीन ज्ञान अर्जित करने की उत्कंठा भी रहती है।
  • यह विधि मनोविज्ञान के नियमों पर आधारित है तथा बाल केंद्रित विधि है।
  • प्रश्नोत्तर विधि प्राथमिक कक्षाओं के लिए उपयोगी नहीं है जबकि यह माध्यमिक कक्षाओं के लिए अधिक उपयोगी है।
  • शिक्षण संस्थाओं में प्रशिक्षण काल में इस विधि पर अधिक बल दिया जाता है और छात्र इस विधि में क्रियाशील रहते हैं।
  • कक्षा में अनुशासनहीनता की समस्या नहीं होती है सभी छात्रों को क्रियाशील रहना पड़ता है तथा सही उत्तरों को पुष्टि तथा पुनर्बलन प्रदान करता है।

प्रश्नोत्तर विधि की प्रमुख सीमाएं निम्नलिखित है:-

  • प्रश्नोत्तर विधि उच्च कक्षाओं के शिक्षण के लिए उपयोगी नहीं है परंतु व्याख्यान पद्धति में इसकी सहायता लेनी पड़ती है।
  • जिसमें बालकों को पाठ्यवस्तु का बोध समग्र रूप में नहीं हो पाता है ।
  • सभी अध्यापक उत्तम प्रकार के प्रश्न निर्मित नहीं कर पाते।
  • इस विधि के उपयोग के लिए शिक्षक को अच्छे प्रश्नों का चुनाव करना आना चाहिए
  • यह विधि प्रश्नों द्वारा संचालित होती है।
  • यह पद्धति यांत्रिक है प्रश्नोत्तर से नीरसता आ जाती है।

प्रश्नोत्तर विधि के उपयोग हेतु महत्वपूर्ण सुझाव:-

  • इस पद्धति का अनुसरण उन्ही अध्यापकों को करना चाहिए जो प्रश्नों के रचना समुचित ढंग से कर सकते हैं।
  • प्रश्नों के साथ प्रत्यय का स्पष्टीकरण भी किया जाना चाहिए क्योंकि प्रश्नोत्तर द्वारा प्रत्ययों को समझना कठिन होता है।
  • प्रश्नों का वितरण कक्षा में समान रूप से किया जाना चाहिए।
  • छात्रों के सही उत्तर की तत्काल पुष्टि करनी चाहिए जिससे छात्रों को पुनर्बलन दिया जा सके
  • प्रश्नों की व्यवस्था तार्किक क्रम में करनी चाहिए।
  • कक्षा में तनाव को कम करने के लिए हास्य विनोद के लिए भी प्रश्न पूछने चाहिए। प्रश्नोत्तर विधि (Question Answer Method)

प्रश्नोत्तर विधि / तर्क विधि /सुकराती विधि

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