शिक्षण का अर्थ तथा उद्देश्य (Meaning and Aims of Teaching)

शिक्षण क्या है? शिक्षण का अर्थ, Shikshan kya he? Shikshan Ke Uddeshy, Shikshan ka Arth, शिक्षण के उद्देश्य, What is Teaching, Aims of Teaching, Meaning of Teaching.

  • शिक्षण का अर्थ
  • शिक्षण का व्यापक व संकुचित अर्थ
  • शिक्षण की परिभाषाएं
  • उत्तम शिक्षण की परिभाषाएं
  • शिक्षण के प्रमुख उद्देश्य
  • शिक्षण में प्रयुक्त प्रमुख क्रियाकलाप

जैसा कि आप सभी जानते हैं शिक्षा किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला होती है l शिक्षा के माध्यम से ही हम अपने देश के भावी कर्णधारों को उनकी महत्वपूर्ण भूमिका से परिचित कराते हैं l शिक्षा की प्रक्रिया को प्रभावी रूप से संचालित करने वाले केंद्र के रूप में विद्यालय की भूमिका अति महत्वपूर्ण होती है l

शिक्षण का अर्थ (Meaning of Teaching)

शिक्षण का अर्थ क्या होता है? साधारण भाषा में हम कह सकते हैं कि विद्यालयों में सीखने-सिखाने व पढ़ने-पढ़ाने की प्रक्रिया सामान्य रूप से शिक्षक के माध्यम से संपन्न की जाती है और इसे ही शिक्षण कहा जाता है l रयबर्न के अनुसार ” शिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को इस योग्य बनाना है कि वह सफल जीवन जी सके”, l

शिक्षा एक त्रिध्रुवीय, गत्यात्मक, अंतः क्रियात्मक तथा उद्देश्य पूर्ण प्रक्रिया है

शिक्षण के तीन प्रमुख ध्रुव होते हैं :-
  1. शिक्षक
  2. शिक्षार्थी
  3. पाठ्यक्रम / पाठ्यवस्तु

उपरोक्त तीनों ध्रुवों के मध्य संबंध स्थापित करने की प्रक्रिया ही शिक्षण है l तीनों पक्षों के मध्य संबंध स्थापित करने का कार्य शिक्षक अपने शिक्षण के माध्यम से करता है l शिक्षण में इन तीनों पक्षों का होना अति आवश्यक है l

शिक्षण का सामान्य अर्थ

ज्ञान प्रदान करना या तथ्यों का बोध कराना शिक्षण है l विद्यालय में छात्र अकेले ही ज्ञान प्राप्त नहीं करता है, बल्कि शिक्षक अपने ज्ञान को छात्रों तक पहुंचाने के लिए कक्षा में विभिन्न क्रियाकलापों शिक्षण अधिगम सामग्री शिक्षण विधियांओं जैसे खेल, वार्तालाप, प्रश्न, वर्णन, कहानी-कविता, t.l.m. तथा पाठ्य पुस्तकों का सहारा लेता है l वह अपने शिक्षण द्वारा ही छात्रों को विषय वस्तु सीखने के लिए प्रोत्साहित करता है l

शिक्षण और अधिगम एक दूसरे से संबंधित है l शिक्षण तब तक अधूरा है, जब तक सीखने वाले में अपने ज्ञान को अपने जीवन में प्रयोग करने की क्षमता ना उत्पन्न हो l शिक्षण शब्द का प्रयोग प्राचीन काल से होता रहा है और इसकी सफलता सीखने वाले द्वारा प्राप्त या अर्जित ज्ञान पर निर्भर है l शिक्षण उस समय ही होता है जब कुछ सीखा जाता है l

शिक्षण का व्यापक व संकुचित अर्थ क्या है?

शिक्षण का सामान्य अर्थ बताना अत्यंत कठिन है l शिक्षा की भांति शिक्षण के भी दो अर्थ होते हैं l व्यापक अर्थ व संकुचित अर्थ l

शिक्षा का व्यापक अर्थ (Wider Meaning of Teaching) :-

व्यापक अर्थ में शिक्षण मनुष्य के जीवन में निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है l जिसके अंतर्गत सभी व्यक्ति, वस्तुएं, वातावरण, साधन, माध्यम व घटनाएं व्यक्ति को जन्म से मृत्यु तक कुछ ना कुछ सिखाती हैं l परिवार, विद्यालय, समाज, वातावरण, उद्योग, सिनेमा, राजनीति, कला व साहित्य, प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से मनुष्य को कुछ ना कुछ शिक्षण अवश्य प्रदान करते हैं l इस प्रकार के शिक्षण में औपचारिक व अनौपचारिक दोनों प्रकार के साधनों से व्यक्ति जीवन भर सीखता रहता है l

शिक्षण का संकुचित अर्थ (Narrower Meaning of Teaching) :-

निश्चित उद्देश्य को लेकर निश्चित समय में निश्चित स्थान पर निश्चित व अनुभवी व्यक्तियों द्वारा दी जाने वाली प्रक्रिया को शिक्षा का संकुचित अर्थ कहते हैं l

संकुचित अर्थ में बालकों को ज्ञान, सूचना, जानकारी व परामर्श देना ही शिक्षण है यह शिक्षण पूर्व नियोजित व नियंत्रित होता है, तथा बालक को कुछ निश्चित वर्षों तक ही दिया जाता है l और इसमें केवल औपचारिक साधनों का प्रयोग होता है l उदाहरण के लिए विद्यालय एवं कक्षा कक्ष में विद्यार्थियों को प्रदान किया जाने वाला शिक्षण शिक्षण का संकुचित रूप है l

शिक्षण की परिभाषाएं (Meaning of Teaching)

डॉक्टर माथुर के अनुसार – ” शिक्षण का अर्थ शिक्षार्थियों को ऐसे अवसर प्रदान करना है जिनसे शिक्षार्थी अपने अवस्था एवं प्रकृति के अनुसार समस्याओं को हल करने की क्षमता प्राप्त कर सके वह स्वयं योजना बना सके शैक्षिक सामग्री इकट्ठा कर सके उसे शो संगठित रूप में प्रयोग कर सके तथा लक्ष्य को प्राप्त कर सकें” l

रायंस के अनुसार – ” दूसरों को सीखने के लिए दिशानिर्देश देने तथा अन्य प्रकार से उन्हें निर्देशित करने की प्रक्रिया को शिक्षण कहते हैं”, l

योकम तथा सिम्पसन के अनुसार – ” शिक्षण वह साधन है जिसके द्वारा समूह के अनुभवी सदस्य अपरिपक्व व छोटे सदस्यों का जीवन से अनुकूलन करने में पथ प्रदर्शन करते हैं “, l

जैम्स एम थाइन के अनुसार – ” समस्त शिक्षण का अर्थ सीखने में वृद्धि करना है”, l

शिक्षण के अर्थ व परिभाषा ओं के आधार पर शिक्षण के स्वरूप को निम्न प्रकार से व्यक्त किया जा सकता हैl

  • शिक्षण का अर्थ शिक्षक, विद्यार्थी व पाठ्यक्रम के मध्य संबंध स्थापित करना है l
  • शिक्षण का अर्थ सूचना, ज्ञान व जानकारी देना है l
  • शिक्षण शिक्षक का स्व मूल्यांकन है l
  • शिक्षण तैयारी का एक साधन व सीखने का संगठन है l
  • शिक्षण शिक्षार्थियों को उत्प्रेरित करने, मार्गदर्शन प्रदान करने व क्रियाशील रखने की प्रक्रिया है l
  • शिक्षण का अर्थ सीखना व बालकों को अपने वातावरण के अनुकूल बनाने में सहायता प्रदान करना है l

उत्तम शिक्षण की विशेषताएं (Characteristics of Good Teaching) :-

उत्तम शिक्षण छात्रों में सीखने की तीव्र इच्छा जागृत कर उन्हें विकास की ओर बढ़ाता है l

योकम और सिम्पसन ने अच्छे शिक्षण की निम्नलिखित विशेषताएं बताई है:-

  • उत्तम शिक्षण में छात्रों की व्यैक्तिक विभिन्नताओं को ध्यान में रखा जाता है l
  • यह प्रेरणात्मक व सृजनात्मक होता है l
  • इसमें छात्र सदैव क्रियाशील रहते हैं तथा उनकी अंतर्निहित क्षमताओं का पूर्ण विकास होता है l
  • उत्तम शिक्षण में छात्रों की कठिनाइयों को जानकर उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाता है l
  • अच्छा शिक्षण शिक्षक व छात्रों के सहयोग पर आधारित व प्रगतिशील होता है l
  • अच्छा शिक्षण आदेशात्मक न होकर निर्देशनात्मक व जनतंत्र आदर्शों पर आधारित होता है अर्थात हर छात्र महत्वपूर्ण होता है l

शिक्षण के प्रमुख उद्देश्य (Main Objective of Teaching) :-

तीव्र गति से जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे परिवर्तनों का प्रभाव शिक्षा प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है l जिससे शिक्षा और शिक्षण के उद्देश्य विधियों, प्रविधियों, पाठ्यक्रम व शिक्षक की भूमिका में व्यापक बदलाव आया है l आज शिक्षण का मुख्य व महत्वपूर्ण उद्देश्य सीखने की प्रक्रिया को बाल उपयोगी रुचिकर आनंद दायक प्रभावी व्यवहारिक व बोधगम्य बनाना है l जिससे छात्र अपनी क्षमता के अनुसार विषय वस्तु को अच्छी तरह से समझ सके व उसका यथा समय प्रयोग कर सकें l

शिक्षण के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित है :-

  • बदलते समय के साथ-साथ बच्चों के स्वभाव, रुचियों, सोचने-समझने व सीखने की गति में भी आश्चर्यजनक रूप से परिवर्तन हुआ है जिसके कारण आज शिक्षण कार्य को अधिक व्यावहारिक बनाने की जरूरत है ताकि विद्यालय का हर बच्चा अपनी रुचि, क्षमता, तीव्र गति के अनुरूप सीख सकें l
  • शिक्षण का उद्देश्य शिक्षार्थियों को जीवन उपयोगी ज्ञान प्रदान करके उनके व्यक्तित्व क्षमताओं, योग्यता व कुशलताओं का अधिकतम विकास करना है l
  • शिक्षार्थियों को सीखने के लिए प्रोत्साहित करना जिससे वह पढ़ने व अन्य कार्यों में रुचि ले सके l
  • छात्रों में आत्मविश्वास की भावना जागृत करना
  • छात्रों की मूल प्रवृत्तियों को सही दिशा देना हुआ उनमें स्वस्थ दृष्टिकोण का विकास करना जिससे वे समाज देश व विश्व कल्याण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें l
  • छात्रों में नेतृत्व क्षमता तथा नैतिक व सामाजिक मूल्यों का विकास करना l
  • छात्रों को स्वास्थ्य, स्वच्छता व अपने परिवेश के प्रति जागरूक बनाना l
  • छात्रों को मार्गदर्शन करना क्योंकि उचित समय पर प्राप्त मार्गदर्शन सफलता दिलाने में सहायक होता है l
  • छात्र-छात्राओं को सक्रिय रखना हुआ उनमें रचनात्मक दृष्टिकोण का विकास करना l
  • छात्रों की कठिनाइयों को दूर करना हुआ अशुद्धियों को निवारण करना l
  • छात्रों को अपने वातावरण से समायोजन करना सिखाना ताकि वह समाज व लोकतांत्रिक राष्ट्र के जिम्मेदार नागरिक बन सकें l

शिक्षण में प्रयुक्त प्रमुख क्रियाकलाप :-

  • विषय व पाठ्यवस्तु आधारित गतिविधियों / क्रियाकलापों को कराना l
  • छोटे व बड़े समूह में कार्य कराना जिससे बच्चे स्वयं कार्य करते हुए सीख सके, समझ सके
  • प्रश्नोत्तर व प्राप्त उत्तरों को सही बच्चों के सामने स्पष्ट करना l
  • प्रायोगिक कार्य कराना
  • चर्चा- परिचर्चा करवाना
  • महत्वपूर्ण बिंदुओं को श्यामपट्ट पर लिखना
  • प्रेरणा व आवश्यक सुझाव प्रदान करना
  • मूल्यांकन करना स्वाध्याय व विचार विमर्श के अवसर प्रदान करना
  • ऐसे प्रोजेक्ट कार्य कराना जिन्हें बच्चे स्वयं व साथियों के सहयोग से कर सके
  • विविध प्रकार के अभ्यास कार्य कराना व उनकी जांच करना
  • वर्णन, व्याख्यान व कथन कहना
  • शैक्षिक व मनोरंजनात्मक खेल आयोजित करना

निष्कर्ष :-

वर्तमान संदर्भों में शिक्षण केवल ज्ञान सूचना हुआ जानकारी प्रदान करना ही नहीं शिक्षण तथा सीखना दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं l शिक्षण का कार्य अधिगम में प्रभावशीलता लाना है l शिक्षण एक कार्य है जबकि अधिगम एक उपलब्धि है l शिक्षण तभी सार्थक व प्रभावी होगा जब छात्र सीखे गए विषय विज्ञान के आधार पर अपने व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन ला सके तथा जीवन के विभिन्न क्षेत्रों व परिस्थितियों में उसका समुचित उपयोग कर सकें l

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