किंडर गार्डन पद्धति (Kinder Garten System)

Kinder Garten System || फ्रोबेल विधि || किंडर गार्डन पद्धति || फ्रोबेल विधि ||

खेल विधि के जन्मदाता जर्मनी के आध्यात्मिक दार्शनिक फ्रेडरिक अगस्ट फ्रोबेल थे। Fredric August Froebel का जन्म 1782 ईस्वी में जर्मनी में हुआ था। फ्रोबेल के अनुसार “बालक एक अविकसित पौधा है जो कि शिक्षक रूपी माली की देखरेख में अपने आंतरिक नियमों के अनुसार विकसित होताहै “,। यह पद्धति खेल विधि द्वारा छात्रों को सिखाने की सर्वप्रथम शिक्षण पद्धति है।

फ्रोबेल के द्वारा लिखी गई महत्वपूर्ण पुस्तकें :-
• Education of Man
• Mother and Play Song

kindergarten जर्मन भाषा का शब्द है। जिसमें Kinder (बाल) तथा Garten (उद्यान) अथवा बालोद्यान है ।

  • इसमें खेल, स्वतंत्रता एवं आनंददायक वातावरण का समावेश पाया जाता है।
  • पुस्तकों पर जोर नहीं दिया जाता है।
  • यह विधि छात्रों को आत्म अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करती है।
  • इस विधि में खेल के द्वारा शिक्षा पर बल दिया जाता है।

किंडरगार्टन पद्धति के सिद्धांत :-

  1. एकता का सिद्धांत (Principle of Unity) :- संसार की सभी वस्तुएं ईश्वर ने उत्पन्न की है उनमें विभिनता होते हुए भी समानता है इस विधि में ईश्वर को प्रथम माना गया है
  2. विकास का सिद्धांत (Principle of Self Development) :- संसार की प्रत्येक वस्तु का विकास होता है और वह अंदर से बाहर की ओर होता है इसी प्रकार बालक का भी अंदर से बाहर एक सामाजिक प्राणी के रूप में विकास होता है
  3. स्वयं क्रिया का सिद्धांत (Principle of Self Activity) :- बालक में कुछ प्रवृत्तियाँ जन्मजात होती हैं जो कार्य करने के लिए प्रेरित करती है यदि उनके अनुसार बालक को प्रेरित किया जाए तो बालक के व्यक्तित्व का पूर्ण विकास हो जाता है
  4. समाजीकरण का सिद्धांत (Principle of Socialization) :- बालक समाज में रहता है इसलिए इस शिक्षा का समाज से संबंध होना चाहिए इसके लिए जरूरी है कि सभी बालक साथ साथ हैं
  5. खेल द्वारा शिक्षा का सिद्धांत (Principle of Education Through Playway) :- बालक को खेल के द्वारा शिक्षा देने से उसमें रचनात्मक शक्ति का विकास होता है सीधा व ज्ञान लंबे समय तक बना रहता है

किंडर गार्डन पद्धति में अभिव्यक्ति के साधन :-

  • गीत
  • गति
  • रचना

किंडर गार्डन पद्धति के शिक्षण उपकरण :-

खेल गीत :-

फ्रोबेल ने अपनी पुस्तक में 50 गीत लिखे हैं जो कि बच्चे, मां और अध्यापक के लिए हैं इस गीत को गाने से बालकों की ज्ञानेंद्रियां मांसपेशियां प्रशिक्षित होती हैं।


उपहार :-

यह देखने में खेलने की वस्तुएं लगती है ,जिनके संख्या 20 है , परंतु 7 प्रमुख उपहार हैं।

  1. प्रथम उपहार :- विभिन्न रंगों की ऊन की गेंद यह गेंदे की गति व दिशा का ज्ञान करवाती हैं।
  2. दूसरा उपहार :- लकड़ी के गोले घन या बेलन इनसे गति व स्थिरता का ज्ञान कराया जाता है।
  3. तीसरा उपहार लकड़ी का एक घन जो छोटे-छोटे 8 घनो में विभाजित होता है।
  4. चौथा उपहार :- लकड़ी का एक बड़ा गंजो 8 आयत की रचनाओं से बना है जिसमें आयत की लंबाई, चौड़ाई से दुगनी और चौड़ाई, मोटाई से दोगुनी होती है।
  5. पांचवा उपहार :- 27 छोटे-छोटे घनों में विभाजित एक बड़ा घन होता है।
  6. छटा उपहार एक बड़ा घन जिसमें 18 बड़े व 9 छोटे विषम चतुर्भुज होते हैं।
  7. सातवा उपहार :- दो रंगों की चौकोर व तिकोनी पट्टियां

उन्हें सम्मान देने हेतु उनके कब्र पर रखे पत्थर पर एक घन सिलेंडर तथा जींद रखी हुई है।


कार्य या व्यापार :-

व्यापार बालक को कार्य करने का अवसर देकर उनकी रचनात्मक शक्ति कल्पनाशक्ति व सृजनात्मक शक्ति का विकास करते हैं। व्यापार जैसे कागज मोड़ना, काटना धागा बनाना, चटाई बनाना, डिजाइन बनाना, टोकरी बनाना, माला गूथना इत्यादि हो सकता है।

किंडरगार्टन पद्धति के गुण

  • यह पद्धति बालक का सामाजिक विकास करती है।
  • शारीरिक मानसिक विकास की एकता पर बल देती है।
  • खेल को शिक्षण का आधार मानती है।
  • यह विधि बाल केंद्रित है।
  • इस बात में विश्वास का विकास करती है।
  • इस विधि के द्वारा बालक करके सीखते हैं तथा स्वयं क्रिया के द्वारा सीखने बल देती है।

किंडरगार्टन पद्धति के दोष :-

  • खेल गीत छात्रों की समझ से परे है।
  • गोला बेलन व उपहार किस चीज के प्रतीक है यह बालकों को स्पष्ट नहीं हो पाता।
  • उपहार कृत्रिम होता है जैसे लकड़ी और ऊन इनके प्रयोग की विधि मनमानी होती है।
  • पढ़ाई जाने वाली विषयों में किसी प्रकार का से सहसंबंध नहीं है।

खेल विधि क्या है ?

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