रुचिपूर्ण शिक्षण (Interest Based Teaching)

रूचिपूर्ण शिक्षण, रुचिपूर्ण शिक्षण क्या है? रुचिपूर्ण शिक्षन के लाभ, Ruchipurn shikhshan, रुचिपूर्ण शिक्षण का अर्थ

रुचिपूर्ण शिक्षण या आनंदायी शिक्षण का अर्थ (Meaning of Interest Based Teaching)

रुचिपूर्ण शिक्षण से आशय है शिक्षण की ऐसी विद्या से जो बालक की अभिरुचियों को ध्यान में रखते हुए उनके सर्वांगीण विकास हेतु विकसित की गई है l जैसा कि हम सभी जानते हैं कि प्रत्येक बालक की रुचि समान नहीं होती उन सभी में व्यक्तिगत विभिन्नता पाई जाती हैंl

उदाहरण के लिए एक बालक पढ़ने में रुचि रखता है, तो दूसरा बालक खेलने में और तीसरा बालक संगीत सुनने में इस प्रकार तीनों बच्चों को अलग-अलग बातों से लगाव या रूचि होती है l

सामान्यता रुचि एक मानसिक प्रक्रिया है जिसके आधार पर कोई वस्तु अच्छी या खराब लगती है l अतः शिक्षक को उनकी रुचि के अनुकूल स्थूल पदार्थों, चित्र, चार्ट, मॉडल पाठ पढ़ाते समय अवश्य करना चाहिए l

बालक जिज्ञासु प्रवृत्ति के होते हैं l वह अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं l उनकी इस प्रवृत्ति को जागृत रखने और तृप्त करने का दायित्व शिक्षक का ही होता है l अतः शिक्षा के सार्वजनिककरण एवं उपलब्धि सुनिश्चित कराने हेतु शिक्षा विभाग द्वारा 1994 में रूचि पूर्ण शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया गया था l

रूचि पूर्ण शिक्षण एक समयबद्ध कार्यक्रम तथा सुविचारित रणनीति है l यह बालकों को शिक्षा देने हेतु आकर्षक एवं बाल केंद्रित प्रणाली है l जिसमें बालकों को आनंदित करने वाले क्रियाकलाप एवं विद्यालय में छात्र के प्रति शिक्षक का हेय रहित, मित्रवत, आत्मीय व्यवहार होता है l

यह गीतो, कहानियों तथा खेलो द्वारा सरल गतिविधि प्रधान बाल केंद्रित शिक्षण है l यह एक ऐसी विद्या है जो शिक्षण को रोचक एवं प्रभावी बनाकर शिक्षा के सार्वजनिक करण के लक्ष्य प्राप्ति में सहयोगी हैं l

रुचिपूर्ण शिक्षण के उद्देश्य :-

रुचि पूर्ण शिक्षा का लक्ष्य ज्ञान एवं व्यवहार की दूरी को समाप्त करके शिक्षा को जीवन से जोड़ना है l रूचि पूर्ण शिक्षण के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं l

  • बालकों को नामांकन, ठहराव तथा गुणात्मक शिक्षा की संप्राप्ति l
  • विद्यालय का बाहरी एवं आंतरिक सौंदर्य करण करके उसे एक आनंदमयी केंद्र के रूप में विकसित करना l
  • शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को क्रियाकलाप आधारित बनाकर प्रत्येक बालक की सहभागिता सुनिश्चित करना l
  • शिक्षक को एक मित्र एवं सहयोगी के रुप में कल्पित करना l
  • शिक्षकों की आपसी समझ और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित कर उनकी बौद्धिक, रचनात्मक एवं कलात्मक दक्षताओं का समुचित उपयोग करना l
  • समुदाय का सहयोग प्राप्त करना l
  • निर्धारित दक्षताओं संबंधित कौशलों का विकास करके न्यूनतम अधिगम स्तर को प्राप्त करना l
  • ह्रास एवं अवरोध को रोकना l
  • विद्यालय का वातावरण सरल, आकर्षक, शैक्षिक एवं सौंदर्यपूर्ण बनाना l

रुचिपूर्ण शिक्षण की विशेषताएं

रुचिपूर्ण शिक्षा सीखने-सिखाने की कार्यशैली से जो बच्चों की रुचि, आनंद, रुझान आदि को ध्यान में रखते हुए खेल विधि, गीत, रोचक क्रियाओं आदि के द्वारा दक्षताओं का विकास किया जाता है l

जब दक्षताओं का विकास होगा तो अधिगम की संप्राप्ति अवश्य होगी l ऐसी स्थिति में शिक्षा की गुणवत्ता एवं न्यूनतम अधिगम स्तर की संप्राप्ति सुनिश्चित हो जाती है l

रूचिपूर्ण शिक्षण की निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं:-

  • बच्चों की अंतर्निहित शक्तियों का विकास करके उनका सर्वांगीण विकास करना l
  • बच्चों हेतु सुरुचिपूर्ण एवं आनंददाई शिक्षण पद्धति का प्रयोग करना l
  • करके सीखने का रुचिपूर्ण तरीका अपनाना l
  • उबाऊ और अनावश्यक वातावरण को हटाकर रोचक प्रस्तुतीकरण करना l
  • सीमित संसाधनों से परिवेश को आकर्षक बनाने का प्रयास करना l

रूचि प्रशिक्षण में सिखाने हेतु किए जाने वाले क्रियाकलाप

बच्चों की सीखने में क्रियाकलापों का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है l जब हम किसी विशेष दक्षता के लिए कोई गतिविधि करते हैं तो उसका बच्चों पर काफी असर पड़ता है l तथा उन्हें जो अधिगम होता है वह स्थायी होता है l क्योंकि वह स्वयं करके सीखते हैं l

छात्र जिन विद्या व क्रियाकलापों के द्वारा सहायता से सीख लेता है वह निम्नलिखित है :-

  • गीत
  • कविता
  • कहानी
  • चित्रण
  • खेल
  • अभिनय
  • नाटक
  • भ्रमण
  • निरीक्षण
  • पहेली
  • वार्तालाप
  • पर्यावरण में पाई जाने वाली वस्तुओं का उपयोग

रुचि प्रशिक्षण में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए :-

  • बालक स्वभाव से क्रियाशील होते हैं
  • बच्चे हर समय कुछ ना कुछ करना चाहते हैं l
  • वह जिज्ञासु एवं कल्पनाशील होते हैं l
  • वह नित्य नई नई क्रियाओं में अधिक रूचि लेते हैं l

उपयुक्त मनोवैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर रूचि पूर्ण शिक्षा में सभी वस्तुओं का, सभी विधाओं का समावेश किया गया है l जो बालक की अभिरुचि यों को ध्यान में रखते हुए उनके सर्वांगीण विकास हेतु विकसित की गई है l

दल शिक्षण

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