आगमन विधि (Inductive Method)

आगमन विधि, Inductive Method, aagman vidhi

यह विधि विशिष्ट से सामान्यीकरण की ओर सिद्धांत पर आधारित है। इस विधि में बालकों का ध्यान अनेक विशिष्ट उदाहरणों पर केंद्रित कर उनकी सहायता से सामान्यीकरण द्वारा सिद्धांत निकलवाए जाते हैं। इसके उपरांत प्राप्त सिद्धांत की सत्यता सिद्ध करने के लिए शिक्षक कुछ और उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसके पश्चात शिक्षक छात्रों से नियम निकलवाता है।

आगमन विधि का उदाहरण :-

हम विभिन्न धातुओं की सलाखें लेकर उसके एक सिरे को गर्म करते हैं बालक दूसरे सिरे को छू कर देखेंगे कि उस धातु का दूसरा सिरा भी गरम हो रहा है तो वह इससे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि समस्त धातु में ऊष्मा के सुचालक होती है।

इसी प्रकार गणित शिक्षण में भी उदाहरणों तथा मुख्य समस्याओं के आधार पर नियम बनाए जाते हैं। भाषा में भी व्याकरण पढ़ाने के लिए यह विधि अत्यंत उपयोगी है। इसमें नियमों को पहले ना बता कर उदाहरण प्रस्तुत किए जाते हैं और फिर नियम बताए जाते हैं। यह विधि मनोवैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित है कि क्रिया सर्वप्रथम विशिष्ट की ओर होती है समान्यीकरण की अवस्था बाद में आती है।

आगमन विधि के पद :-

  • उदाहरण :- शिक्षक विभिन्न उदाहरणों का चयन कर विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत करता है।
  • निरीक्षण:- विद्यार्थी समस्त उदाहरण का अवलोकन कर आपस में तुलना करता है उनमें समानता देखता है और एक परिणाम पर पहुंचता है।
  • नियमीकरण :- विद्यार्थी एक परिणाम पर पहुंचकर नियम का निर्माण करता है।
  • परीक्षण :- विद्यार्थी कुछ अन्य उदाहरण द्वारा नियम की सत्यता की जांच करता है।

आगमन विधि की विशेषताएं

  • विद्यार्थी इस विधि के द्वारा स्वयं परिश्रम करता है।
  • विद्यार्थी स्वाभाविक रूप से ज्ञान प्राप्त करता है।
  • विद्यार्थियों को अन्वेषण तथा खोज करने का प्रोत्साहन मिलता है।
  • विद्यार्थी में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है।
  • इस विधि से अध्ययन करना सरल, रोचक बन जाता है।
  • यह विधि प्रत्यक्ष तथ्यों पर आधारित है।
  • यह एक वैज्ञानिक विधि है।
  • यह छोटी कक्षाओं के लिए बहुत उपयोगी है।
  • इस विधि द्वारा प्राप्त ज्ञान स्थायी होता है।

आगमन विधि की सीमाएं :-

  • इस विधि में ज्ञानार्जन की गति बहुत धीमी होती है।
  • यह बड़ी कक्षाओं के लिए कम उपयोगी है।
  • शिक्षक द्वारा नियम विद्यार्थियों को पहले से ना बताएं।
  • उदाहरण बहुत ही रोचक एवं आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
  • उदाहरणों का चयन विद्यार्थियों के बौद्धिक स्तर के अनुकूल होना चाहिए।

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