आगमन विधि (inductive Method)

आगमन विधि (inductive Method) | Aagman Vidhi | इडक्टिव मेथड | आगमन विधि क्या है ? Aagman Vidhi

आगमन विधि के जनक फ्रांसिस बेकन व पेस्टोलॉजी है। आगमन विधि में अनुभव, प्रयोगों तथा उदाहरणों का विस्तृत अध्ययन करके उनसे नियम बनाए जाते हैं ।

आगमन विधि (inductive method)

इस विधि में सर्वप्रथम शिक्षक विद्यार्थियों के सामने कुछ परिस्थितियां, क्रिया एवं अवधारणा को प्रस्तुत करता है। तथा शिक्षक इन परिस्थितियों, क्रियाओं, उदाहरणों को माध्यम बनाकर विद्यार्थी उनका तार्किक ढंग से विचार-विमर्श करके किसी सिद्धांत और नियम तक पहुंचता है।

आगमन विधि प्राथमिक कक्षाओं में एक प्रभावशाली विधि (Effective Method) है। आगमन विधि अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) उत्पन्न करता है।

आगमन विधि मुख्यता विशिष्ट के सामान्य की ओर (Specific to General) ज्ञात से अज्ञात की ओर (Known to unknown), स्थूल से सूक्ष्म की ओर (From Concrete to Abstract) तथा उदाहरण से नियम की ओर (From Example to Rules) पर आधारित होती है।

आगमन विधि गणित, विज्ञान व व्याकरण पढ़ाने हेतु श्रेष्ठ विधि कहलाती है। यह विधि अवबोधन स्तर (Understanding Level )का शिक्षण कराती है।

आगमन विधि के पद (Steps of Inductive Method) :-

  • उदाहरण या क्रियाएं (Example or Activities)
  • अवलोकन या निरीक्षण (Observation)
  • सामान्यीकरण या नियमीकरण (Generalization)
  • परीक्षण व सत्यापन (Testing &Verification)

आगमन विधि के गुण (Merits of Inductive Method) :-

  • आगमन विधि द्वारा अर्जित ज्ञान प्रत्यक्ष तथ्यों पर आधारित होता है। इसलिए यह विधि एक मनोवैज्ञानिक की विधि है।
  • इस विधि द्वारा ज्ञान प्राप्त करने में विद्यार्थी में आत्मनिर्भरता व आत्मविश्वास बढ़ता है
  • इस विधि के उपयोग से विद्यार्थी की पाठ में रुचि बनी रहती है।
  • इस विधि द्वारा विद्यार्थियों की आलोचनात्मक, निरीक्षण एवं तर्क शक्ति का विकास होता है।
  • यह विधि अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित करती है।
  • इस विधि द्वारा प्राप्त ज्ञान स्थाई होता है क्योंकि इसमें विद्यार्थी स्वयं परिश्रम करके सीखता है।
  • इस विधि द्वारा गणित के नवीन नियम, सिद्धांत, सूत्र. निष्कर्ष आदि ज्ञान प्राप्त किए जा सकते हैं।
  • यह विधि छोटी कक्षाओं के लिए अत्यधिक उपयोगी है।
  • यह विधि गत्यात्मक दृष्टिकोण (Dynamic View) का विकास करती है।
  • यह विधि विद्यार्थियों को नवीन ज्ञान प्राप्त करने के लिए सदैव उत्प्रेरित करती है।
  • इसमें पहले उदाहरण देने या क्रियाएं कराने के कारण विद्यार्थी सूत्र की खोज में सक्रिय रहते हैं।

आगमन विधि के दोष :-

  • यह विधि केवल छोटे बालकों के लिए उपयोगी सिद्ध होती है, बड़े बालकों के लिए नहीं
  • इस विधि का प्रयोग कठिन है क्योंकि आंकड़ों का एकत्रीकरण, वर्गीकरण तथा विश्लेषण प्रत्येक विद्यार्थी नहीं कर सकता है।
  • इस विधि द्वारा कार्य करने की गति धीमी पड़ती है।
  • इस विधि द्वारा सभी नियमों का शिक्षण असंभव है।
  • इसमें अध्यापक निष्क्रिय रहते हैं।
  • इस विधि द्वारा सीखने में अधिक समय व धन खर्च होता है व अधिक प्रयत्न करने पड़ते हैं।
  • संपूर्ण पाठ्यक्रम को इस विधि द्वारा नहीं पढ़ाया जा सकता है।
  • यदि बालक इसमें अशुद्ध सिद्धांत निकाल देता है तो उसे पुनः शुद्ध ज्ञान कराना कठिन हो जाता है।
  • अनुभवी और योग्य अध्यापक की इस विधि को सही रूप में प्रयोग कर सकते हैं।

निगमन विधि क्या है ?

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