इतिहास जानने के स्रोत

इतिहास जानने के स्रोत | इतिहास जानने के साधन | इतिहास के कालखंड का निर्धारण

इतिहास जानने के स्रोत क्या क्या होते हैं? इतिहासकार किन स्रोतों के उपयोग से इतिहास के कालखंड का पता लगता है l इतिहास जानने के साधन के साधन क्या है |इतिहास के कालखंड का निर्धारण कैसे होता है |

हजारों वर्ष पहले के लोगों के बारे में जानना हो तो उनके बारे में जानने के लिए इतिहास का अध्ययन किया जाता है। इतिहासकार अतीत से प्राप्त तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर बीते समय की जानकारी देते हैं। इतिहास बीते हुए समय में और उस समय के लोगों को समझने और जानने का एक साधन है।

इतिहासकार कैसे पता लगाते हैं?

अतीत में एक ऐसा भी युग था जब लोग लिखना नहीं जानते थे। उन लोगों को जीवन के विषय में हमें जानकारी उनके द्वारा छोड़ी हुई वस्तुओं जैसे मिट्टी के बर्तन, खिलौने, हथियारों और औजारों द्वारा मिलती है। प्राय: इन वस्तुओं को पुरातत्वविदों जमीन के अंदर से खोदकर प्राप्त करते हैं। यह वस्तुएं ऐतिहासिक जानकारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उपलब्ध सामग्री के आधार पर इतिहासकारों ने अतीत को तीन भागों में बांटा है। वह समय जिसके लिए कोई भी लिखित सामग्री उपलब्ध नहीं है उसे पूर्व ऐतिहासिक काल या प्राकएतिहासिक काल कहते है। इसी प्रकार जिस काल के विषय में लिखित सामग्री से जानकारी मिलती है एवं उसे पढ़ा भी जा सकता है उस काल को ऐतिहासिक काल कहते हैं।

  • भोजपत्र :- भूर्ज नामक पेड़ की छाल पर लिखे गए लेख को भोजपत्र कहते हैं।
  • ताम्रपत्र :- तांबे के पतले एवं चपटे टुकड़े पर लिखे गए लेख को ताम्रपत्र कहते हैं।
  • स्तंभ लेख :- पत्थर के खंभों पर लिखे लेख को स्तंभ लेख कहते हैं।
  • शिलालेख :- पत्थर की चट्टानों पर लिखे लेखों को शिलालेख कहते हैं।
  • ताड़ पत्र :- ताड़ के पेड़ के चौड़े पत्ते पर लिखे गए लेख को ताड़ पत्र कहते है।

मानव ने जब लिखना शुरू किया तब उसे कागज का ज्ञान नहीं था। वह अपने लेखों को ताड़ पत्र, भोजपत्र और ताम्रपत्र पर लिखता था। कभी-कभी लिख बड़ी शिलाओ, स्तंभों, पत्थरों की दीवारों मिट्टी या पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़ों पर भी लिखे जाते थे। आधुनिक इतिहास के विषय में हमें जानकारी तत्कालीन लेखों से प्राप्त होती है।

इतिहास को जानने के स्रोत निम्नलिखित प्रकार के हो सकते हैं-
• पुरातात्विक स्रोत
• साहित्यिक स्रोत

1.पुरातात्विक स्रोत :-

पुरातात्विक स्रोतों में अभिलेखों का काफी महत्व होता है। कई राजा अपने शासन काल के विषय में बड़े-बड़े अभिलेख का निर्माण करते थे। जिसके द्वारा उस समय के राज्य काल के विषय में जानकारी मिलती है। इसी प्रकार महान अशोक के अभिलेख पत्थर पर उत्पन्न होने के कारण महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है।

1.1 सिक्के एवं मुहरें :-

सिक्कों से तत्कालीन शासक का नाम उसका समय सिक्के की बनावट से उस समय की कला तथा धातु से आर्थिक स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है। गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम को एक सिक्के पर घुड़सवारी करते हुए दिखाया गया है। जिससे हम कह सकते हैं कि वह अच्छे घुड़सवार थे। इस प्रकार के इतिहास के लेखन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

1.2 सारनाथ स्तूप :-

सारनाथ जो कि उत्तर प्रदेश में स्थित एक जिला है। इस जिले में सारनाथ स्तूप स्थित है। इस स्तूप का निर्माण मौर्य वंश के शासक अशोक ने करवाया था। महात्मा बुद्ध ने सर्वप्रथम सारनाथ में अपना उपदेश दिया था।

2.साहित्यिक स्रोत :-

ताड़ पत्र, भोजपत्र, ताम्रपत्र और चमड़े एवं लकड़ी के पट्टों पर लिखित लेखों के साथ साथ कुछ साहित्यिक ग्रंथों से भी हमें लोगों के रहन-सहन, विचारों, खानपान इत्यादि के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। जैसे रामायण एवं महाभारत, जैन एवं बौद्ध साहित्य जातक कथा, अर्थशास्त्र, राजतरंगिणी, इंडिका इत्यादि। इस प्रकार पुरातात्विक एवं साहित्यिक दोनों स्रोतों से हमें इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है। विदेशी यात्रियों के विवरण से भी हमें तत्कालीन इतिहास की जानकारी मिलती है। प्राप्त स्रोतों की सहायता से ही इतिहासकार और पुरातत्विक अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं।
इतिहासकार अन्य स्रोतों से अतीत की कृषि, पशुपालन, शिल्पकार, कामगार, काम धंधा, व्यापार, नापतोल लेन-देन, कर आदि के आधार पर आर्थिक स्थिति का वर्णन करते हैं। घर, परिवार, स्त्रियों की स्थिति, शिक्षा रहन-सहन, खान-पान, वेशभूषा, मनोरंजन, त्योहार, मेले आदि के आधार पर सामाजिक तथा राजा, प्रजा, शासन, सुरक्षा एवं सैन्य व्यवस्था के आधार पर राजनीतिक स्थिति की जानकारी प्रदान करते हैं । इसी प्रकार कला, आचार-विचार, ज्ञान-विज्ञान की मान्यताएं, धार्मिक विश्वास, देवी-देवता, पूजा-पाठ एवं परंपराओं के आधार पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का वर्णन करते हैंl

इतिहास हमें मानव की संस्कृति उनके धर्म और उनकी सामाजिक व्यवस्था को जानने और समझने में सहायता करता है। इतिहास का अध्ययन अतीत से वर्तमान और भविष्य के लिए सबक लेना सिखाता है। इतिहास में यह भी सिखाता है कि हम उन बातों का अनुसरण कैसे करें जिनसे समरसता और शांति को बढ़ावा मिल सके।
कौन पहले कौन बाद में जब पुरातत्वविद किसी स्थान की खुदाई करते हैं तो वह कैसे समझते हैं कि कौन से स्तर पहले के हैं और कौन से बाद के हैं। किसी पुरास्थल में कई बस्तियों के अवशेष मिल सकते हैं। आमतौर पर लोग जहां रहते हैं घर टूटने पर दोबारा वही घर बना लेते हैं। टूटे-फूटे सामान और कूड़ा करकट भी घरों के आसपास जमा होते रहते हैं। इन कारणों से बस्ती की जमीन धीरे-धीरे ऊंची होती जाती है और सैकड़ों साल के बाद वहां एक टीला बन जाता है। इसलिए जब टीले की खुदाई की जाती है तो उस के सबसे निचले स्तर सबसे पुराना होता है और उसके बाद के स्तर बाद के युगों के होते हैं।

इतिहास में तिथियां :-

इतिहास में कुछ तिथियां ईसा पूर्व में होती है। कुछ एसीबी में ईसा पूर्व का तात्पर्य ईसा मसीह के जन्म से पहले का समय इसे अंग्रेजी में B.C. अथर्व बिफोर क्रिस्ट (Before christ) लिखते है। इसी प्रकार ईस्वी को अंग्रेजी में A.D लिखा जाता है। A.D. लेटिन भाषा के दो शब्दों एनो डोमिनी से बना है। A.D. का मतलब ईसा मसीह के जन्म का वर्ष ईसा मसीह के जन्म के बाद की तिथियां में हम A.D. विधि का प्रयोग करते हैं।

अभिलेख क्या होते हैं :- अभिलेख पत्थर अथवा धातु जैसे कठोर सतह पर लिखे गए लेख को अभिलेख कहते हैं।

स्तूप किसे कहते है :- स्तूप का शाब्दिक अर्थ टीला होता है। अक्सर सभी स्तूपो के अंदर एक डिब्बे में महात्मा बुध या उनके अनुयायियों के शरीर के अवशेष जैसे दांत, हड्डी, राख या उनके द्वारा प्रयोग में लाए सामग्री, अथवा सिक्के रखे रहते हैं

पुरास्थल क्या होते है :- पुरास्थल वह स्थान जहां की खुदाई से औजार बर्तन और इमारतों के अवशेष मिलते हैं इन्हें पुरास्थल कहते हैं। अक्सर पुरास्थल जल स्रोतों जैसे नदी, तालाब, झील व समुद्र किनारे पाए जाते हैं।

संग्रहालय क्या होते :- ऐतिहासिक वस्तु को सुरक्षित रखने के स्थान को संग्रहालय कहते हैं।

धर्मेंत्तर साहित्य क्या होते हैं :- धार्मिक साहित्य से भिन्न साहित्य ग्रंथों को धर्मेत्तर साहित्य कहते हैं। जैसे अर्थशास्त्र तथा राजतरंगिणी है।

अर्थशास्त्र यह ग्रन्थ कौटिल्य अथवा चाणक्य द्वारा लिखा गया मौर्यकालीन समाज की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक स्थिति के विषय में बताता है। राज तरंगिणी यह कल्हण द्वारा लिखा गया है साहित्य है जो कि कश्मीर के 11वीं व 12वीं शताब्दी के इतिहास की विषय में बताता है।

  • महाभारत विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है।
  • लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम विश्व का सबसे बड़ा संग्रहालय है।
  • अलेक्जेंडर कनिंघम को भारतीय पुरातत्व विभाग का जन्मदाता माना जाता है।

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