ह्यूरिस्टिक विधि (Heuristic Method)

Heuristic Method, ह्यूरिस्टिक विधि

ह्यूरिस्टिक (Heuristic) शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के ह्यूरेस्को (Heurisco) से मानी जाती है। ग्रीक भाषा का शब्द ह्यूरेस्को (Heurisco) का अर्थ “ मैं खोजता हूं”। ( I find out myself) । इस विधि के जन्मदाता हेनरी एडवर्ड आर्मस्ट्रांग को माना जाता है।

आर्म्सट्रांग की इस विधि को स्वयं ज्ञान प्राप्त कराने की विधि,अनुसंधान विधि या खोज विधि के नाम से भी जाना जाता है। इस विधि में बालक स्वयं सत्य का पता लगाता हैl

ह्यूरिस्टिक विधि ( Heuristic method) बाल केंद्रित शिक्षण विधि है। इस विधि में विद्यार्थी एक खोजकर्ता होता है। वह स्वयं खोज करके निरीक्षण और प्रयोग करता है और सीखता है। इस विधि में शिक्षक ऐसी गतिविधि को सम्मिलित करता है जिसमें विद्यार्थी स्वतंत्र रहकर कार्य करता है और सीखता है।

ह्यूरिस्टिक शब्द ग्रीक भाषा से आया है जिसका अर्थ होता है ‘खोज करना’ इसमें विद्यार्थी स्वयं खोज करने के लिए उत्साहित होता है।

इस विधि में कक्षा के समक्ष कोई समस्या प्रस्तुत की जाती है। जिसमें प्रत्येक विद्यार्थी की जिम्मेदारी होती है विभिन्न स्रोतों से सूचनाएं एकत्रित करके समस्या को जानना, उसको स्वतंत्रता होती है कि वह कक्षा में इधर उधर जाकर अपने साथियों से समस्या पर चर्चा कर सकते हैं।

प्रत्येक विद्यार्थी को समस्या से संबंधित एक कागज पर निर्देश लिख कर दिए जाते हैं। इसमें विद्यार्थी शिक्षक से बहुत कम दिशा निर्देश प्राप्त करते हैं। जबकि शिक्षक सदैव सहायता करने के लिए तत्पर रहता है।

इसमें विद्यार्थी के निरीक्षण प्रयोग व पढ़ने की क्षमता का विकास होता है। वह सीखता है कि समस्या को कहां से हल करना चाहिए तथा आंकड़ों का संकलन, आंकड़ों को अर्थ प्रदान कर समस्या का समाधान ज्ञात करते हुए निष्कर्ष तक पहुंचते हैं। इस शिक्षण विधि में शिक्षक की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। उनमें से कुछ इस प्रकार है।

  • शिक्षक को ज्ञान का भंडार होना आवश्यक है, ताकि वह विद्यार्थियों को संदर्भ इत्यादि उपलब्ध करा सके
  • शिक्षक एक निर्देशक, कार्य में सहयोगी एवं विद्यार्थी का मित्र होता है।
  • विद्यार्थी के गलत करने पर भी वह गुस्सा नहीं होता है।
  • शिक्षक को कक्षा में कार्य करने के लिए स्वतंत्र वातावरण विकसित करना होता है।

ह्यूरिस्टिक विधि के गुण :-

  • इस शिक्षण विधि से बालकों में वैज्ञानिक और एक समालोचक दृष्टिकोण विकसित होता है।
  • विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनकर खुद में आत्मविश्वास विकसित करता है।
  • इसमें शिक्षक प्रत्येक विद्यार्थी पर ध्यान दे सकता है।
  • इस विधि द्वारा शिक्षक और छात्र में अधिक घनिष्ठता बढ़ती है।
  • विद्यार्थी को वैज्ञानिक विधि का ज्ञान होता है जिससे वह जीवन को व्यवस्थित रूप से जीने की कला सीख लेते हैं।
  • इस विधि में छात्र स्वयं करते हैं। इसलिए उनका मानसिक विकास अधिक होता है और लंबे समय तक उन्हें याद रहता है।
  • इस विधि में विद्यार्थी संपूर्ण कार्य विद्यालय में करता है। इसलिए गृह कार्य करने की समस्या नहीं रहती।
  • यह शिक्षण विधि मनोवैज्ञानिक और शिक्षा के अधिगम सिद्धांत पर आधारित है

ह्यूरिस्टिक विधि की सीमाएं और कठिनाइयां

  • ह्यूरिस्टिक शिक्षण विधि में विद्यार्थी को खोजकर्ता माना जाता है, परंतु विद्यालय में विद्यार्थियों में ज्ञान का विस्तार और चिंतन सीमित होती है इसलिए उनसे एक खोजकर्ता की तरह सभी कार्य वह स्वयं करें यह अपेक्षा संभव नहीं हो पाती।
  • इस शिक्षण विधि पर विशेषज्ञ शिक्षक और प्रतिभाशाली विद्यार्थी ही कार्य कर सकते हैं। इस विधि पर आधारित विशेषज्ञों का मिलना मुश्किल होता है।
  • शिक्षण विधि बहुत धीमी गति से चलती है। अतः भारी-भरकम पाठ्यचर्या को समय पर पूर्ण करने में असमर्थता होती है।
  • शिक्षण विधि में कक्षा में बहुत छोटे समूह की कल्पना की गई है जो हमारे विद्यालय में असंभव है।
  • यह आर्थिक रूप से खर्चीली होती है।
  • इसमें सुसज्जित प्रयोगशाला की आवश्यकता होती है।
  • किसी भी समस्या को ग्रेड या स्तर पर हल करना मुश्किल होता है इसके लिए बहुत कौशल की आवश्यकता होती है।

ह्यूरिस्टिक विधि (Heuristic Method) का अनुप्रयोग :-

  • यह शिक्षण विधि प्राथमिक स्तर की कक्षाओं के लिए उपयुक्त नहीं है पर माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक कक्षाओं के लिए उचित है क्योंकि इन स्तर के विद्यार्थियों में बोध का स्तर ठीक होता है।
  • शिक्षण विधि की सफलता का श्रेय शिक्षक को जाता है जो बहुत सक्रिय ज्ञाता बुद्धिमान और शिक्षण विधि का विशेषज्ञ होता है।
  • इस विधि में प्रयोगशाला पूर्ण रूप से सुसज्जित होना अति आवश्यक हैl

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