विचार-विमर्श विधि (Discussion Method )

विचार-विमर्श विधि | विचार-विमर्श विधि क्या है ? | Vichar Vimarsh Vidhi | what is Discussion Method | विचार विमर्श विधि के गुण | विचार विमर्श विधि की सीमाएं | विचार विमर्श में सावधानियां |

विचार-विमर्श विधि पूर्णत: प्रजातांत्रिक विधि है । विचार-विमर्श कोई व्यर्थ का वाद विवाद या एक समूह के व्यक्तियों द्वारा दूसरे समूह के व्यक्तियों से किया जाने वाला तर्क वितर्क नहीं है ,अपितु यह ज्ञानयुक्त, श्रेष्ठ, तार्किक विचारों का आदान-प्रदान होता है जो कि किसी विषय पर यह समस्या पर सुनियोजित ढंग से उसके सभी पक्षों उसके लाभ-हानि व निष्कर्ष प्राप्त करते हैं तथा समाधान ढूंढने के उद्देश्य से किया जाता है। यह विधि चिंतन स्तर (Reflective Level) का शिक्षण कराती है।


विचार-विमर्श विधि के गुण (Merit of Discussion Method):-

  • इस विधि में प्रत्येक छात्र कक्षा का सक्रिय सदस्य सदस्य रहता है।
  • यह विधि प्रजातांत्रिक विधि है।
  • यह विधि छात्रों को विषय वस्तु का चयन तथा संगठन करना सिखाती है।
  • विचार-विमर्श से छात्रों में चिंतन तथा तर्क शक्ति का विकास होता है।
  • छात्रों में अपने विचारों को सुस्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने की योग्यता का विकास होता है
  • छात्रों में एक दूसरे की भावनाओं का आदर करने तथा परस्पर विरोधी विचारों को स्वीकार करने की आदत का विकास होता है।
  • Discussion Method स्वतंत्र अध्ययन पर जोर देती है।

विचार-विमर्श विधि की सीमाएं (Limitations of Discussion Method) :-

  • इस विधि से अध्ययन करने में समय अधिक लगता है।
  • विषय वस्तु के सभी भागों का अध्ययन इस विधि से नहीं किया जा सकता।
  • Vichar Vimarsh Vidhi का संचालन ठीक न होने पर कुछ भी छात्रों का एकाधिकार हो जाता है।
  • छात्रों में आपसी मतभेद व ईर्ष्या-द्वेषकी भावना विकसित हो जाती है।
  • निरर्थक बातों पर भी विचार विमर्श हो जाता जिससे समय नष्ट होता है।

विचार-विमर्श में सावधानियां-

  • विचार-विमर्श हेतु रुचिकर एवं ऐसे विषय लिए जाएँ जिन पर छात्र आसानी से तथ्य संग्रह कर सके।
  • विचार विमर्श की तैयारी उचित ढंग से की जानी चाहिए।
  • विचार विमर्श के संचालन में यह देखा जाए कि विचार विमर्श उद्देश्यउन्मुखी रहे।
  • छात्रों के साथ-साथ अध्यापक को भी डिस्कशन के दौरान सक्रिय रहना चाहिए।
  • विचार-विमर्श का मूल्यांकन वस्तुनिष्ठ तरीके से किया जाए।
  • तथ्य, ज्ञान के साथ तर्कशक्ति एवं निर्णय लेने की क्षमता के विकास पर बल दिया जाए।

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