डाल्टन विधि या प्रयोगशाला विधि (Dalton or Laboratory Method)

डाल्टन, ठेका विधि || प्रयोगशाला विधि || DaltonMethod || Laboratory Method) || हेलेन पार्क हर्स्ट विधि || ठेकेदारी विधि ||

डाल्टन या प्रयोगशाला विधि के जन्मदात्री अमेरिकन शिक्षा शास्त्री हेलेन पार्क हर्स्ट हैं। शिक्षण की इस विधि को ठेकेदारी प्रथा भी कहते हैं। यह विधि अमेरिका के मैस्चस्टैस में डाल्टन गांव में सन 1920 में लागू हुई थी।

इस योजना में बालक से एक समझौता किया जाता है। निश्चित समय में निश्चित काम का ठेका दिया जाता है । इस दौरान बालकों को पूर्ण स्वतंत्रता दी जाती है और उसे सारी सुविधाएं भी प्रदान की जाती है । यह विधि अवबोधन स्तर ( Understanding Level ) का शिक्षण कराते हैं।

डाल्टन (Dalton) योजना का प्रयोग :-

  • यह योजना 9 वर्ष से ऊपर के बालकों के लिए है।
  • निर्धारित विषय :- प्रतिमाह कितना कार्य करना है?
  • कार्य योजना :– 1 महीना का ठेका देकर उसका चार्ट दिया जाता है।
  • कार्य योजना के अंग :– 4 सप्ताह को चार भागों में बराबर बांट कर प्रत्येक भाग के लिए पांच यूनिट अर्थात 1 महीने में 20 दिन के कार्य का ठेका दिया जाता है।
  • कक्षा प्रणाली नहीं होती ।
  • प्रयोगशाला :- प्रत्येक विषय के लिए अलग-अलग होती हैं।
  • सम्मेलन भवन में सामूहिक विचार विमर्श किया जाता है।
  • प्रगति लेख :- दैनिक, साप्ताहिक और मासिक कार्य की प्रगति को ग्राहक के द्वारा प्रकट किया जाता है।

डाल्टन विधि के गुण :-

  • यह विधि बाल केंद्रित एवं मनोवैज्ञानिक विधि है।
  • इस विधि में रुचि के सिद्धांत का पालन किया जाता है।
  • इस विधि में आत्म अनुशासन का विकास होता है।
  • बालक क्रिया के द्वारा ज्ञान प्राप्त करता है।
  • डाल्टन विधि में बालक पर बंदिश नहीं होती है।
  • इस विधि के द्वारा बालक स्वाध्याय द्वारा सीखता है।

डाल्टन विधि के दोष:-

  • तीव्र बुद्धि बालक जल्दी सीख लेते हैं लेकिन दूसरे बालक तथ्य को जल्दी नहीं सीख पाते।
  • कम आयु के बच्चों के लिए यह विधि अनुपयुक्त है।
  • शिक्षक का काम बढ़ जाता है।
  • अनुशासन की समस्या रहती है।

आगमन विधि

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