एडीएचडी (ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार) – ADHD क्या है?

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ADHD या ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार

ADHD का फुलफॉर्म Attention Deficit Hyperactivity Disorder और हिंदी में एडीएचडी का मतलब ध्यान आभाव सक्रियता विकार है। ध्यान डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) एक मस्तिष्क विकार है जो मस्तिष्क में एक रासायनिक असंतुलन के कारण होता है जो ध्यान, एकाग्रता को प्रभावित करता है।

एडीएचडी (ADHD) यानि अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर दिमाग से संबंधित रोग है। अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिस्ऑर्डर मतलब ध्यान की कमी और अत्यधिक सक्रियता की बीमारी को एडीएचडी कहा जाता है। एडीएचडी की समस्या ऐसे परिवारों में अधिक बिगड़ सकती है जिस परिवार में तनाव का वातावरण रहता है और बच्चों पर पढ़ाई को लेकर अत्यधिक जोड़ दिया जाता है।

एडीएचडी रोग क्या है?

एडीएचडी एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है जिसके कारण व्यवहार में अति सक्रियता पैदा हो जाती है। इस समस्या से ग्रसित बालक लंबे सम तक एक जगह ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते तथा लंबे समय तक बैठने में समस्या का सामना करना पड़ता है। एडीएचडी वाले बच्चे बेहद सक्रिय और कुछ अन्य व्यवहारगत समस्याएं प्रदर्शित कर सकते हैं।

इन बच्चों की देखभाल और इन्हें सिखाना काफी दुष्कर हो जाता है। इस समस्या की वजह से बच्चा स्कूल व समाज में अन्य बच्चों की अपेक्षा पिछड़ जाता है। यह समस्या 6 से 12 साल की उम्र के बच्चों में देखने को ज्यादा मिलती है।

एडीएचडी के लक्षणों को अक्सर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है :-

  1. ध्यान न देना
  2. जरूरत से अधिक सक्रियता
  3. असंतोष।

बच्चों में एडीएचडी के लक्षण :-

  • किसी भी काम को सही तरीके से न कर पाना
  • लापरवाही के कारण बालक मामूली गलतियां करता है
  • हमेशा व्याकुल रहना
  • अक्सर छोटी-छोटी बातें भूल जाना
  • नोटबुक व होमवर्क आदि भूल जाना
  • बालक का बहुत शरारती होना
  • किसी की बात को ध्यान से ना सुनना इसके लक्षण है

एडीएचडी का निदान :-

हालांकि ध्यातिवि (ADHD) का कोई स्थायी उपचार नहीं है फिर भी उपचार से इसके लिए निम्नलिखित प्रयास किया जाना चाहिए :-

  • बच्चे में इसके लक्षण देखने पर मनोचिकित्सक से जांच करवाना जरूरी है।
  • बच्चों में इस समस्या को दूर करने के लिए डॉक्टरी ट्रीटमेंट दिया जा सकता है।
  • बिहेवियर थैरेपी से भी इसका उपचार किया जा सकता है।
  • इस थैरेपी में बच्चे को डांट से नहीं बल्कि प्यार से समझाना जरूरी है।
  • इस समस्या से ग्रसित बालकों के साथ मारपीट नहीं किए जाना चाहिए बल्कि उन्हें प्यार से समझाना जाना चाहिए।
  • लड़कियों की तुलना में लड़कों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है इसका निदान अक्सर स्कूल के शुरुआती वर्षों में हो जाता है , जब बच्चे को ध्यान केंद्रित की समस्या शुरू होती है।

कैसे पहचानें लक्षण –

  • बच्चे का किसी भी काम में मन नहीं लगता है।
  • बच्चा छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा होता है।
  • बच्चे का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है।
  • अक्सर ADHD से ग्रस्त बच्चे हीन भावना के शिकार हो जाते हैं।
  • इन बच्चों को खराब सामाजिक संबंधों का सामना करना पड़ता है।
  • ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार अनुवांशिक रूप से व्यक्ति मे आता है। लड़के, लड़कियों की तुलना मे इसके शिकार अधिक होते हैं।

ADHD के कारण :-

  • अध्ययन के अनुसार यह पता चला है कि अगर परिवार में किसी व्यक्ति को यह समस्या है तो आने वाली पीढ़ी में भी यह समस्या देखने को मिल सकती है।
  • गर्भावस्था के दौरान यदि माता को उचित पोषण खराब रहन-सहन होता तो यह समस्या देखने को मिलती है।
  • गर्भावस्था के दौरान माता द्वारा धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन आदि भी बच्चे में ADHD पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • लेड(सीसा) के उपयोग से भी बच्चे के दिमाग का विकास रुक जाता है और उसमें एडीएचडी जैसी समस्याओं के विकास की संभावना बढ़ जाती है।

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