गतिविधि आधारित शिक्षण (Activity Based Teaching)

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क्रिया / गतिविधि आधारित शिक्षण ( Activity Based Teaching )

शिक्षण पद्धति को अधिक से अधिक गतिविधि आधारित बनाने, बच्चों में रुचि बनाए रखने एवं उनमें तार्किक ढंग से समझ विकसित करने के लिए शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में शिक्षण की नवीन विधाएँ महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं l

बच्चों के व्यवहार, व्यक्तित्व, विद्यालय एवं कक्षा कक्ष में उनकी सहभागिता पाठ्येत्तर गतिविधि में सहभागिता, स्कूल में अनियमितता एवं स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूकता की भावना विकसित हो रही है l

गतिविधि आधारित शिक्षण के उद्देश्य :-

  • कक्षा में गतिविधि आधारित शिक्षण का प्रयोग कराना
  • शैक्षिक गतिविधि / क्रियाकलापों से परिचित कराना l
  • गतिविधि के द्वारा अनेक दक्षताओं का विकास करना l
  • शिक्षण को रोचक व प्रभावी बनाना l
  • खेल-खेल में शिक्षण के द्वारा सिखाना l
  • बच्चों की रुचियां, मनोवृति व स्तर को समझते हुए शिक्षण करना l
  • कक्षा में बच्चों की सक्रियता का विकास करना l
  • कक्षा में सुचारू संचालन में सहायक होना l

गतिविधि आधारित शिक्षण का अर्थ :-

क्रियापरक विधि का अर्थ :- छात्र का अपनी स्वयं की क्रिया के द्वारा ज्ञान प्राप्त करना क्रियापरक शिक्षण कहते हैं l छात्र की क्रिया से तात्पर्य है जिस क्रिया को छात्र किसी उद्देश्य से पूर्ण करता है, उसको पूर्ण करने में उसका शरीर और मस्तिष्क दोनों ही क्रियाशील रहते हैंl इस आधार पर ज्ञात होता है कि छात्र की क्रियाएं दो प्रकार की होती है l पहले शारीरिक तथा दूसरी मानसिक l

उन सभी क्रियाओं के द्वारा जिनमें बच्चे रूचि पूर्वक, जिज्ञासा, कौतुहल, लग्न तथा मनोयोग से सक्रिय रहकर कार्य करते हुए सीखते हैं वह गतिविधि कहलाती है l गतिविधि से तात्पर्य उन सभी क्रियाओं से है जिनकी सहायता से शिक्षक के द्वारा विषय वस्तु को कक्षा में रोचक एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए तथा बच्चों उसमें रुचि लें l

परिभाषा :-

सोइनचेन के अनुसार :- “क्रिया परक विधि का प्रयोग उस समय किया जाता है जब किसी विषय के शिक्षण में लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए छात्रों के द्वारा किसी प्रकार की क्रिया की जाती है”, l

गतिविधि के प्रकार (Types of Activities) :-

  1. शारीरिक गतिविधि :- कदमताल, पीटी, हाथ ऊपर नीचे करना, उछल कूद इत्यादि l
  2. मानसिक गतिविधि :- चिंतन, मनन, तर्क. वार्तालाप, वर्ग पहेली, पहेली पूछना, लेखन करना, भाषण देना इत्यादि l
  3. शारीरिक एवं मानसिक दोनों :- पशु पक्षी के नाम लेते हुए आगे या पीछे कूदना, वर्ग कूद तथा अक्षर कुछ इत्यादि l

गतिविधि आधारित शिक्षण के लाभ :-

  • शारीरिक क्षमता का विकास
  • बालकों में दिशाओं का ज्ञान होता है
  • उड़ने वाले पक्षियों का ज्ञान पशु-पक्षी संबंधित भेद ज्ञान
  • सक्रियता का विकास
  • जोड़ और घटाने का ज्ञान
  • गिनती के बढ़ते और उतरते क्रम का ज्ञान

गतिविधि आधारित शिक्षण में ध्यान देने योग्य बिंदु :-

  • कक्षा में सभी बच्चों को गतिविधि में भाग लेने का अवसर मिले l
  • बच्चों में किसी प्रकार का भय ना हो l
  • गतिविधि रुचिपूर्ण हो l
  • गतिविधि बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना उत्पन्न करने वाली होनी चाहिए l
  • गतिविधि बच्चों के अंदर जिज्ञासा उत्पन्न करने वाली होनी चाहिए l
  • गतिविधि का उद्देश्य बच्चों को केवल शारीरिक उछल कूद ही नहीं अपितु उनका मानसिक अभ्यास भी होना चाहिए l
  • गतिविधि के नियमो में आवश्यकतानुसार बदलाव भी किए जा सके l

गतिविधियां कराने के तरीके :-

शिक्षक तीन प्रकार की गतिविधियां करा सकते हैं

  1. ज्ञान प्राप्त करने वाली गतिविधि
  2. ज्ञान व्यक्त करने वाली गतिविधि
  3. अनुभव व्यक्त करने वाली गतिविधि

यह गतिविधियां लिखित और मौखिक, एकल और सामूहिक, सामग्री की साथ या सामग्री के बिना किसी भी रूप में कराई जा सकती हैं l अभिनय, कहानी, नाटक, कविता, हाव-भाव, भ्रमण, अवलोकन तथा प्रोजेक्ट कार्य आदि गतिविधियों की श्रेणी में आते हैं l

गतिविधि आधारित शिक्षण विधि की विशेषताएं:-

  • गतिविधि आधारित शिक्षण विधि की निम्नलिखित विशेषताएं हैं l
  • यह विधि छात्र को स्वयं करके सीखने का अवसर प्रदान करती है जिससे छात्र ज्ञानार्जन करता है l
  • यह विधि छात्रों को कार्य करने में इतना मग्न कर देती है कि उसे ज्ञान अर्जन करते समय थकान का अनुभव बिल्कुल नहीं होता है l
  • यह विधि शिक्षक केंद्रित न होकर के बाल केंद्रित होती है l
  • इस विधि के द्वारा छात्र क्रियाशील होकर पाठ्य विषय में रुचि का अनुभव करता है l
  • यह विधि पाठ्य-पुस्तकों को महत्व न देकर वस्तुओं के संग्रह, पर्यटन, अवलोकन और परीक्षण को महत्व देती है l
  • यह विधि छात्रों को अनेक वस्तुओं को बनाने का प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी व्यवसायिक कुशलता को बढ़ाती है l

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1 thought on “गतिविधि आधारित शिक्षण (Activity Based Teaching)”

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